Science behind tears
आँसुओं और आँख के मध्य केवल एक वैज्ञानिक संबंध है जो कि जैविक समस्थापन (biological homeostasis) और प्रकाशिक अभियांत्रिकी (optical engineering) की एक सटीक प्रणाली है। चूँकि कॉर्निया पूरी तरह से अवाहिकाविहीन (avascular) होता है—यानी अपनी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसमें रक्त वाहिकाएं नहीं होती हैं—इसलिए यह घुली हुई ऑक्सीजन के माध्यम से "साँस लेने" और आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करने के लिए अश्रु फिल्म (tear film) की जलीय परत (aqueous layer) पर निर्भर करता है।
रासायनिक रूप से, म्यूसिन परत (mucin layer) आँख की कोशिकीय सतह से द्रव को जोड़े रखने के लिए एक जैविक प्राइमर के रूप में कार्य करती है, जबकि बाहरी लिपिड परत (lipid layer) इसके तीव्र वाष्पीकरण को रोकती है। प्रकाशिक रूप से, यह द्रव सीमा कॉर्निया की सूक्ष्म विषमताओं को भर देती है, जिससे एक पूर्णतः सुचारू अपवर्तक इंटरफ़ेस (refractive interface) बनता है जो आने वाले प्रकाश को सटीक रूप से मोड़ने और केंद्रित करने के लिए आवश्यक है। हर बार पलक झपकाने के साथ ही रोगाणुओं को निष्क्रिय करने वाले लाइसोजाइम (lysozyme) जैसे रोगाणुरोधी एंजाइमों के साथ मिलकर काम करते हुए, आँसू एक गतिशील और सुरक्षात्मक बाह्यकोशिकीय आव्यूह (extracellular matrix) के रूप में कार्य करते हैं, जो आँख के संरचनात्मक स्वास्थ्य और उसकी दृश्य तीक्ष्णता (visual acuity) दोनों के लिए अनिवार्य है। इसमें कविता लिखने जैसा सच मे कुछ भी खास नहीं।
आँसुओं को महज़ "ग़म के मोती" या "दिल का आईना" कहकर, कवि अक्सर उनके पीछे छिपे एक बेहद गहरे और वैज्ञानिक सौंदर्य को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। वे आँख को केवल भावुकता का एक निष्क्रिय माध्यम मान लेते हैं, और यह भूल जाते हैं कि हमारी दृष्टि को धुंधला होने से बचाने के लिए प्रकृति पर्दे के पीछे कितनी जटिल द्रव गतिकी (fluid dynamics) और सेलुलर इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर रही है। यह एक बेहद दिलचस्प विडंबना है कि जब एक शायर या कवि अपने विरह में आँसू बहा रहा होता है, तब उसकी आँखें लिपिड, पानी और म्यूसिन की एक बेहतरीन 'ट्रिपल-लेयर' सुरक्षा दीवार खड़ी करने में व्यस्त होती हैं—ताकि उसकी कॉर्निया को ऑक्सीजन मिलती रहे और वह उस कागज़ को देख सके जिस पर वह कविता लिख रहा है। सच्चा सौंदर्यबोध विज्ञान की अनदेखी करने में नहीं, बल्कि उस अद्भुत जैविक वास्तुकला को सराहने में है जो हमारी तीव्र भावनाओं के तूफ़ान को सहते हुए भी हमारी आँखों की हिफ़ाज़त करती है।
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